Wednesday, November 11, 2009

रूप तुम्हारा



-डॉ. अशोक प्रियरंजन

सपनों में आकर बस जाता रूप तुम्हारा,
हर पल अपने पास बुलाता रूप तुम्हारा ।

कुछ खट्टी कुछ मिट्ठी यादें करती आंख मिचौली,
अक्सर पूरी रात जगाता रूप तुम्हारा ।

आंखें, खुशबू, ओंठ सलोने और चमकता चेहरा
कितने सारे रंग दिखाता रूप तुम्हारा ।

तुम आओ तो महके चंदन, तुम जाओ फैले सन्नाटा,
मुझको सम्मोहित कर जाता रूप तुम्हारा ।

अहसासों के फूल खिलाए, उम्मीदों की धरती पर,
रोज नए अरमान जगाता रूप तुम्हारा ।

मैं जानूं या मेरी आंखें ही सच को पहचानें,
तुम क्या जानो कैसा लगता रूप तुम्हारा ।

शब्द शब्द संगीत रचाते, मन की वीणा पर रंजन,
गीत, गजल खुद ही बन जाता रूप तुम्हारा ।

(फोटो गूगल सर्च से साभार)

13 comments:

Udan Tashtari said...

आंखें, खुशबू, ओंठ सलोने और चमकता चेहरा
कितने सारे रंग दिखाता रूप तुम्हारा ।

बहुत खूब!! बेहतरीन!

शारदा अरोरा said...

डाक्टर रँजन , आपने तकरीबन एक साल बाद ब्लॉग पर फ़िर से लिखना शुरू किया है , बहुत अच्छा लिखा है , कवितायें सकारात्मकता लिए हुए बहुत अच्छी बन पड़ीं हैं |
शुभकामनाएं

Babli said...

बहुत सुंदर और भावपूर्ण कविता लिखा है आपने जो दिल को छू गई! हर एक पंक्तियाँ लाजवाब है!

Apanatva said...

bahut sunder rachana .

दिगम्बर नासवा said...

आंखें, खुशबू, ओंठ सलोने और चमकता चेहरा
कितने सारे रंग दिखाता रूप तुम्हारा ।

Shrangaar ko aapne shabdon mein utaar diya hai ...lajawaab gazal hai .. har sher se ras tapakta ...

Kusum Thakur said...

बहुत अच्छी रचना है , बधाई !!

संगीता पुरी said...

बहुत खूबसूरत रचना !!

shikha varshney said...

wah bahut suhana hai roop kavita ka.

वाणी गीत said...

शब्द शब्द संगीत रचाते, मन की वीणा पर रंजन,
गीत, गजल खुद ही बन जाता रूप तुम्हारा ।

खूब रचाई रूप माधुरी ने कवितायेँ ..!!

Rajey Sha said...

गीत, गजल खुद ही बन जाता रूप तुम्हारा ।
अच्‍छा चि‍त्र है रंजन जी।

radhasaxena said...

bhavanao v abhivyakti ka achcha samayojan.Behtareen prastuti.

radhasaxena said...

bhavanao v abhivyakti ka achcha samayojan.Behtareen prastuti.

RAJENDRA KUMAR PATHAK said...

aajkal bahut ladkiyon ke upar hi likhte ho